Category: आध्यात्म

सन्यासी या गृहस्थ – किसकी तपस्या बड़ी?

संसार से भागे फिरते हो भगवान् को तुम क्या पाओगे इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे 1964 में आयी फिल्म चित्रलेखा का यह गीत संन्यास की सार्थकता पर एक गहरा मन-मंथन प्रस्तुत करता हैं। ईश्वर कण कण में हैं तो उसकी खोज के लिए संसार छोड़ने की क्या आवश्यक्ता…

By Dr.Gunjarika Ranka December 22, 2018 0

आध्यात्मिक होना… मतलब?

चाहे आप किसी भी धर्म में आस्था रखते हों, हम में से ज्यादातर इस बात पर तो यकीन रखते ही हैं की हमारे चारों और कोई अदृश्य शक्ति तो हैं। कभी शाश्वत सत्य की खोज, कभी ग्रह-नक्षत्रों की गणना, कभी आत्मा की यात्रा की खोज, कभी अनेकानेक अनुत्तरित आध्यात्मिक चमत्कारिक घटनाओं का मंथन कर के…

By Dr.Gunjarika Ranka December 9, 2018 0

Soulmate यानि जीवनसाथी ?

soul mate यानि आत्म-सखा… आत्मा का साथी… मनमीत ! मनमीत यानि वो जो मुझे समझता हो, मुझे कैसा महसूस होता हैं, उसे ये कह के बताना नहीं पड़ता, बिन कहे जो समझ ले — वही हैं soul mate ! बहुत खूबसूरत एहसास ! Soulmate — ‘आत्म-सखा’ यानि दोस्ती का उच्चतम स्तर! कोई ऐसा जिस से सोच…

By Dr.Gunjarika Ranka December 7, 2018 0

क्यों हैं दिवाली सिद्धरात्रि?

दिवाली क्यों मनाते हैं? क्या हैं दिवाली का आध्यात्मिक महत्व? कुछ कारण जो हम सब जानते हैं – इस दिन श्री राम माँ सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे इसलिये उनका स्वागत किया गया और माँ लक्ष्मी की आराधना की गयी कि, अयोध्या में अब सुख समृद्धि का राम राज्य रहें।  इस…

By Dr.Gunjarika Ranka October 20, 2017 0

दुःख के वेश में आया है…सुख !

जो भी हमारे साथ होता है वह हमारे पूर्व कर्मों का फल है। कुदरत का कानून (law of karma) सुनिश्चित करता हैं की हमारा किया हमारें आगे अवश्य आये और नियति बिना चूकें उन लोगों को…. उन परिस्थितियों को हमारे आगे ला के खड़ा कर देती हैं जिनके साथ कुछ पिछला  बकाया हैं और बकाया…

By Dr.Gunjarika Ranka July 20, 2017 0