उलझ न जाये रिश्तों की डोर!

नेहा…. नेहा… क्या बात हैं अभी तक नाश्ते की कोई तैयारी नहीं हुई हैं वक़्त का कुछ पता चलता हैं तुम्हें या नहीं?? सुनीता जी की तेज आवाज़ घर में गूँज गयी। नेहा उनकी बहु हैं, पांच महीने पहले ब्याह के आयी हुई। सौरभ उनकी आवाज़ सुन कर तुरंत रसोई में आया “मम्मी नेहा की…

By Dr.Gunjarika Ranka January 3, 2019 0

5 अचूक तरीके जिनसे आप रूखें (rude) लोगों को निरुत्तर कर सकते हैं!

बहुत मुश्किल होता है खुद को रोकना जब बिना किसी वजह के कोई लगातार आपसे रूखा व्यवहार करता हो। हमें कोई हमारी गलती बताये तो बुरा नहीं लगता पर ऐसा करते हुए वह रूखेपन/बदत्तमीजी से बात करें तो वही बात चुभ जाती हैं। तीखे शब्द तीखे चाकू से भी ज्यादा गहरे चुभते हैं। ऐसी ही…

By Dr.Gunjarika Ranka December 29, 2018 0

सन्यासी या गृहस्थ – किसकी तपस्या बड़ी?

संसार से भागे फिरते हो भगवान् को तुम क्या पाओगे इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे 1964 में आयी फिल्म चित्रलेखा का यह गीत संन्यास की सार्थकता पर एक गहरा मन-मंथन प्रस्तुत करता हैं। ईश्वर कण कण में हैं तो उसकी खोज के लिए संसार छोड़ने की क्या आवश्यक्ता…

By Dr.Gunjarika Ranka December 22, 2018 0

क्या करें जब कोई अपना ही हो मन का दंश ?

‘घर’ दुनिया की सबसे प्यारी जगह ! ‘परिवार’ सबसे सुरक्षित माहौल का नाम ! पर कभी-कभी यही वह जगह बन जाती हैं जहाँ आपका मन सबसे ज्यादा दर्द से गुजरता हैं। जहां से स्नेह, भरोसे का अमृत मिलना चाहिए वहीँ किसी से विषैला व्यवहार मिल रहा होता हैं। दोस्त, पड़ौसी या किसी दूर के रिश्तेदार…

By Dr.Gunjarika Ranka December 10, 2018 0

आध्यात्मिक होना… मतलब?

चाहे आप किसी भी धर्म में आस्था रखते हों, हम में से ज्यादातर इस बात पर तो यकीन रखते ही हैं की हमारे चारों और कोई अदृश्य शक्ति तो हैं। कभी शाश्वत सत्य की खोज, कभी ग्रह-नक्षत्रों की गणना, कभी आत्मा की यात्रा की खोज, कभी अनेकानेक अनुत्तरित आध्यात्मिक चमत्कारिक घटनाओं का मंथन कर के…

By Dr.Gunjarika Ranka December 9, 2018 0