कुछ हैं, जो बहुत थका रहा हैं… कुछ हैं, जिसे बदलने की जरुरत हैं… 
कब से अनसुना कर रहें हैं आप अपने मन से आने वाली इन मद्धम आवाज़ों को?
हफ़्तों, महीनों या सालों से….??

अपने मन को अब और प्रतीक्षा मत करवाइये, खुद को हालात के हवाले रखना छोड़िये और अपने जीवन की बागडोर अपने हाथों में लीजिये।

आप शायद सोच रहें होंगे

क्या मुझे काउन्सलिंग की जरुरत हैं ?

ये हैं कुछ सामान्य निशानियाँ जो बताती हैं के आप अपने जीवन में एक सार्थक बदलाव चाहते हैं :
  • आपके मन में अपने जीवन को लेकर कुछ विचार (ideas) चलते रहते हैं। ये विचार आपको उत्साहित करते हैं लेकिन फिर आपको अपनी परिस्थितियाँ याद आ जाती हैं और आपका मन बोझिल होने लगता हैं।
  • आप हमेशा ये देखते रहते हैं के और लोग अपना जीवन कैसे जी रहे है, आपको लगता हैं के वे बहुत भाग्यशाली हैं, के काश आप भी उनकी तरह अपना जीवन अपनी तरह से जी पाते। सबके साथ अपनी यह तुलना अब आपको बहुत थकाने और निराश करने लगी हैं।
  • अपने हालातों के चलते आप बहुत परेशान हो गए हैं और आपमें कड़वाहट भरने लगी हैं।

आप अक्सर सोचते होंगे

काउन्सलिंग कैसे काम करती हैं?

काउन्सलिंग के बारे में एक सबसे सामान्य विचार यह हैं के कॉउंसलर के पास लोग अपनी समस्याएँ ले कर जाते हैं और कॉउंसलर उन समस्याओं को सुलझा देते हैं। वास्तव में कॉउंसलिंग एक द्विपक्षीय प्रक्रिया हैं।
  • यह समझिये के काउन्सलिंग गणित के सवाल की तरह नहीं होती जो किसी ने पूछा और कॉउंसलर ने हल कर दिया। यह व्यक्ति की “सोच” पर काम करने की प्रक्रिया है। इसमें वक़्त लगता है।
  • कॉउंसलर आपको “निर्देश” नहीं देते के “क्या करना चाहिये,” वे आपके “नज़रिए में बदलाव” लाने पर काम करते है। इसके लिए एक सेशन काफ़ी नहीं होता।
  • कितने सेशन लेने होंगे यह इस बात पर निर्भर करता हैं के समस्या किस तरह की हैं।
  • आम तौर पर पाँच-छः सेशन्स में व्यक्ति अपने मन को संतुलित कर सकने की दिशा में आने लगता हैं पर फिर भी यह नियम सब पर लागू हो ऐसा जरूरी नहीं हैं।
  • काउन्सलिंग सेशन बुक करवाने से पहले जो सबसे जरुरी बात जो आपको समझ लेनी चाहिये के काम आपको स्वयं पर ही करना होगा, कॉउंसलर इसके लिए आवश्यक रणनीति बनाने में आपके सहायक की भूमिका में होते हैं।
  • कॉउंसलर आपके विचारों को स्पष्टता दिलवाने में सहायता करते हैं जिससे के आप अपनी परिस्थितियों का सटीक आँकलन कर पाएँ।

काउन्सलिंग से क्या फायदा होता हैं ?

मनोवैज्ञानिक काउन्सलिंग आपको अपने आप से परिचित करवाने की प्रक्रिया हैं। अपने आप से दोस्ती के कुछ फायदे निम्नलिखित हैं :
  • आप स्वयं को पहचानते हैं
  • अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर पाते हैं
  • आप अपनी प्राथमिकताओं को तय करना सीखते हैं
  • आप अपनी क़ाबलियत में बेहतरी अनुभव करने लगते हैं
  • अपने निर्णयों को लेना और उन निर्णयों की जिम्मेदारी लेना – दोनों सीखते हैं
  • आप अपने निजी और व्यावसायिक लक्ष्यों को बेहतर तरीके से तय कर पाते हैं
  • आप अपने मन के हाथों में झूलते नहीं बल्कि मन का नियन्त्रण अपने हाथ में लेना सीखते हैं.
  • तनाव से निपटने की सूझबूझ विकसित होती हैं
  • विचारों में स्पष्टता आती हैं तो आत्मविश्वास बढ़ता हैं
  • जटिल मसलों को बिना विचलित हुए, सुलझाना सीखते हैं
  • अपनी आत्मघाती आदतों को बदलने में सहायता मिलती हैं
  • अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकने का बेहतर तरीका सीखते हैं
  • निर्णय लेने में आने वाली रुकावटों जैसे ग्लानि, डर, आदि को समझते हैं और उनसे deal कर सकना सीखते हैं.
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