Category अध्यात्म (Spiritualism)

हम सभी एक आध्यात्मिक यात्रा पर हैं, इसका भान किसे कब हो पाता हैं यह और बात हैं। हो सकता हैं के आध्यात्मिक यात्रा ने अभी-अभी आपको आकर्षित करना शुरू किया हो, ये भी हो सकता हैं के एक अरसा बीत चुका हैं आपको आत्मा के पारलौकिक स्वरूप को स्वीकारे। दोनों ही स्थितियों में जब के सतही जीवन से ऊपर उठने की ललक आप में जग चुकी हैं तो प्रश्न आता हैं इस मार्ग पर आगे कैसे बढ़ें?
अध्यात्म एक जीवन शैली का नाम हैं। इस श्रेणी में उन सभी लेखों को शामिल किया गया है जो आत्मा और आध्यात्मिक यात्रा को सुनने, समझने और उनसे जुड़ने के बारे में हैं।

दुःख के वेश में आया है…सुख!

अपनी ही उलझनों में फिरें भरमाया.. दुःख के वेश में आया हैं सुख! मेरे मन तूं पहचान ना पाया…” ‘होनी हो कर रहती हैं कोई शक्ति इसे बदल नहीं सकती’ सुना हैं न ये ?  पर किसको कहते हैं ‘होनी’……

क्योंकि हर ग्रह कुछ कहता हैं…

पृथ्वी से लाखों करोड़ो मील दूर स्थित ग्रह मेरे जीवन को प्रभावित कर रहे हैं! कैसे..? मैं कितनी भी कड़ी मेहनत करूँ, मैं अपने कार्य में कितना भी कुशल क्यों न हूँ, ग्रह निर्धारित करेंगे कि मुझे सफल होना हैं…

भाग्य रचयिता के औज़ार – संस्कार!

व्यक्ति का व्यवहार उसके स्वभाव से ही नियंत्रित होता हैं, सही बात हैं। कोई भी आत्मा अपने संस्कार ले के आती हैं, ये भी सही हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने इन्ही गुणों के अनुसार व्यवहार करते हैं। ये गुण भी प्रकृति…

नियति अटल है पर भाग्य रचयिता है हम !

परिस्थितियां अटल है और फिर भी भाग्य रचयिता मैं हूँ ! कैसे? आइये इसे एक साधारण समीकरण से समझते हैं। भाग्य =  नियति  + वर्तमान कर्म  ‘नियति’ यानि वे परिस्थितियां जो हमारे सामने हमारी इच्छा अनिच्छा के बिना आती हैं।…

कुदरत का कानून- Law of Karma!

लॉ ऑफ़ कर्मा (law of karma) यानि “कर्म का सिद्धांत”  या  “कुदरत का कानून” क्या अर्थ है इसका? कर्म का साधारण अर्थ है “कोई कार्य करना” पर ध्यान रहे हमारी सोच, हमारे शब्द और हमारे कार्य ये सभी “कर्म” के अंतर्गत आते हैं…

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