Category अध्यात्म (Spiritualism)

हम सभी एक आध्यात्मिक यात्रा पर हैं, इसका भान किसे कब हो पाता हैं यह और बात हैं। हो सकता हैं के आध्यात्मिक यात्रा ने अभी-अभी आपको आकर्षित करना शुरू किया हो, ये भी हो सकता हैं के एक अरसा बीत चुका हैं आपको आत्मा के पारलौकिक स्वरूप को स्वीकारे। दोनों ही स्थितियों में जब के सतही जीवन से ऊपर उठने की ललक आप में जग चुकी हैं तो प्रश्न आता हैं इस मार्ग पर आगे कैसे बढ़ें?
अध्यात्म एक जीवन शैली का नाम हैं। इस श्रेणी में उन सभी लेखों को शामिल किया गया है जो आत्मा और आध्यात्मिक यात्रा को सुनने, समझने और उनसे जुड़ने के बारे में हैं।

क्यों हैं दिवाली सिद्धरात्रि?

कार्तिक माह की अमावस्या, दीपावली का महापर्व. यह सिर्फ उत्सव की ही रात्रि नहीं हैं, आध्यात्म जगत में यह रात्रि इतनी अधिक महत्वपूर्ण हैं के इसे "सिद्धरात्रि" कहा जाता हैं. क्या हैं ऐसा इस रात्रि में जो ये मन्त्रों को सिद्ध कर देने का सामर्थ्य रखती हैं?

ख़ास हैं शरद पूर्णिमा!

स्वागत, शरद पूर्णिमा के चन्द्रमा! विज्ञान ने बताया के चन्द्रमा उपग्रह है। धरती के आकर्षण में बँधा घूमे जा रहा है युगों से…धरती का जो आकर्षण चाँद को बाँध रहा, उस आकर्षण से धरती भी अछूती कहाँ है… धरती का…

मांगलिक होने का अर्थ क्या हैं?

शादी के लिए योग्य वर/वधु की तलाश के शुरू होते ही अक्सर एक और वाक्य सुनाई देने लगता हैं – लड़की मांगलिक हैं लड़का मांगलिक ही ढूँढना!  इस एक शब्द “मांगलिक” को एक हौव्वे की तरह समाज के सामने रख दिया…

आध्यात्मिक होना…मतलब?

चाहे आप किसी भी धर्म में आस्था रखते हों, हम में से ज्यादातर इस बात पर तो यकीन रखते ही हैं की हमारे चारों और कोई अदृश्य शक्ति तो हैं। कभी शाश्वत सत्य की खोज, कभी ग्रह-नक्षत्रों की गणना, कभी…

सन्यासी या गृहस्थ – किसकी तपस्या बड़ी?

संसार से भागे फिरते हो…भगवान् को तुम क्या पाओगे इस लोक को भी अपना न सके…उस लोक में भी पछताओगे 1964 में आयी फिल्म चित्रलेखा का यह गीत संन्यास की सार्थकता पर एक गहरा मन-मंथन प्रस्तुत करता हैं। ईश्वर कण-कण…

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