Category मनःस्थली (Mental Health)

मन क्या हैं? दिल या दिमाग या इन दोनों से अलग कोई तीसरी चीज? मन के साथ जुडी सबसे दिलचस्प बात ये है के इस नाम का कोई ऑर्गन हमारे शरीर में है ही नहीं! लेकिन फिर भी, ये मन, हमारे शरीर के हर एक अंग को, हर एक सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। एक ओर, मन हमें तर्क को व्यवस्थित करने, योजना बनाने, समझने, बनाने, कल्पना करने और तर्क का उपयोग करने में मदद करता है लेकिन दूसरी ओर, अनियंत्रित मन अज्ञानी, पूर्वाग्रही, घृणित, अतार्किक, और बहकाने वाला होता है।
मन का इस्तेमाल रचनात्मक भी हो सकता हैं यही मन अकल्पनीय विनाश के उपकरण के रूप में भी बदल सकता है। हमारे सभी दुख मन से उपजते हैं और मन में ही बसते हैं अनकहे ख़याल, विश्वास, सोच और सुख।
इस श्रेणी में उन सभी लेखों को शामिल किया गया है जिन्हें हमने मन को समझने के बारे में लिखा है।

सम्भालिये अपने अंदर के मौसम को

मन का अंतर्द्वंद सिर्फ अनिर्णय की अवस्था ही नहीं देता, अनचाहे निर्णय लेने को बाध्य भी करता हैं. इसका असर सिर्फ हमारी भावनाओ पर ही नहीं पड़ता बल्कि शरीर के अंदर का पूरा मौसम इसकी चपेट में आता है. शरीर के सभी अंग एक निश्चित तरह की प्रोग्रामिंग के तहत काम करते हैं तो शरीर के भीतर का मौसम संतुलित बना रहता हैं। शरीर के अंदर का मौसम यानी...

कहाँ से हो कर जाता हैं “विवेक” का रास्ता

ये सारी स्थितियाँ वे थी जब चित्त को स्थिर रखने की ज़रूरत थी। यह समय संतुलन खोने का नहीं था। पर भावनाएँ विचलित थी, बुद्धि यह प्रमाणित करने में लगी थी मैं सही हूँ जब अंदर इतने तूफ़ान चल रहें हो तो कौन रखता मन को स्थिर? मन को उसकी स्थिरता लौटा देने का दायित्व प्रकृति में हमारे ही शरीर के एक सिस्टम को सौंपा है और इसका नाम है...

मिलिये मन के बॉस से!

भावनाएं उबाल पर होती हैं तो तर्कबुद्धि की बात नहीं सुनना चाहती, कभी भावनाओं की टीम बहुत डरी हुई होती हैं, तर्कबुद्धि उन्हें अपने लिए स्टैंड लेने को कहती हैं पर भावनाएँ साथ नहीं देती। बुद्धि और भावनाओं के बीच अंतर्द्वंद शुरू हो जाता हैं। भावनाएँ यानि हार्मोन्स की बटालियन और तर्क बुद्धि यानि विचारों का एक पूरा जंजाल। जब भावनाएँ अपनी तरफ खींचती हो और तर्क बुद्धि अपनी तरफ. ऐसे में निर्णय कौन ले? यही समय है जब मामला सुपर बॉस के पास जाना चाहिए।

मन क्या होता हैं?

कौन हैं मन?  दिल? दिमाग? या इन दोनों से अलग कोई तीसरी चीज…?? मन के साथ जुडी सबसे दिलचस्प बात ये है के इस नाम मन कोई ऑर्गन हमारे शरीर में है ही नहीं लेकिन फिर भी ये मन, हमारे शरीर…

चॉइस नहीं है समलैंगिकता

“माँ मेरे लिए लड़कियाँ देखना बंद करो मैं आपसे कह चुका हूँ मैं शादी नहीं कर सकता। क्यों नहीं कर सकता ये भी बता चुका हूँ।” नरेश की तल्ख़ आवाज़ घर में गूँज गयी।  सरिता जी की रुलाई फूट गयी…

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