Category मनःस्थली (Mental Health)

मन क्या हैं? दिल या दिमाग या इन दोनों से अलग कोई तीसरी चीज? मन के साथ जुडी सबसे दिलचस्प बात ये है के इस नाम का कोई ऑर्गन हमारे शरीर में है ही नहीं! लेकिन फिर भी, ये मन, हमारे शरीर के हर एक अंग को, हर एक सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। एक ओर, मन हमें तर्क को व्यवस्थित करने, योजना बनाने, समझने, बनाने, कल्पना करने और तर्क का उपयोग करने में मदद करता है लेकिन दूसरी ओर, अनियंत्रित मन अज्ञानी, पूर्वाग्रही, घृणित, अतार्किक, और बहकाने वाला होता है।
मन का इस्तेमाल रचनात्मक भी हो सकता हैं यही मन अकल्पनीय विनाश के उपकरण के रूप में भी बदल सकता है। हमारे सभी दुख मन से उपजते हैं और मन में ही बसते हैं अनकहे ख़याल, विश्वास, सोच और सुख।
इस श्रेणी में उन सभी लेखों को शामिल किया गया है जिन्हें हमने मन को समझने के बारे में लिखा है।

डिप्रेशन – जब अपने ही भीतर रूठ जाये कोई!

मैं बहुत सहनशील हूँ, सब बर्दाश्त कर के भी रिश्ते निभाना आता है मुझे। ना-ना मैं कभी किसी को पलट कर जवाब नहीं देती! क्लेश नहीं शांति चुनती हूँ! किसी को तो रिश्तों की नींव बनना ही होगा ना, जो…

जब कोई अपना ही हो मन का दंश?

‘घर’ दुनिया की सबसे प्यारी जगह ! ‘परिवार’ सबसे सुरक्षित माहौल का नाम ! पर कभी-कभी यही वह जगह बन जाती है जहाँ आपका मन सबसे ज्यादा दर्द से गुजरता है। जहां से स्नेह, भरोसे का अमृत मिलना चाहिए वहीँ…

हर एक बात पर कह देते हो , तू क्या है!

हर एक बात पर कहते हो तुम कि तू क्या हैं ! तुम्हीं कहो के ये अंदाज-ए-गुफ़तगू क्या हैं !! मियां ग़ालिब का ही नहीं हमारा भी अक्सर वास्ता पड़ता हैं ऐसे लोगों से…! बड़ा मुश्किल हो जाता है खुद…

जब डिप्रेशन उलझाए हर बात…इस तरह दें अपना साथ !

डिप्रेशन से जूझते वक़्त हर छोटी से छोटी बात भी चुनौती बन जाती हैं। काम पर जाना हो, रिश्तेदारियाँ निभानी हो, दोस्तों से मिलना हो यहाँ तक की सुबह बिस्तर छोड़ना भी एक दुष्कर कार्य बन जाता हैं। पिछली बार…

डिप्रेशन – रोग या सिर्फ मन का वहम?

“अब अपने दिल पर मेरी हुकूमत नहीं रही सियासत से अपनी अब, ये इलाका भी चला गया…” इश्क़? जी नहीं ये डिप्रेशन भी हो सकता हैं !! कितना जानते हैं आप डिप्रेशन को? आप कहेंगे डिप्रेशन यानि.. हर वक़्त की…

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